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नाम, जन्मतिथि और पहचान बदलकर दूसरा पासपोर्ट हासिल करने का आरोप, पुलिस ने शुरू की जांच
रिपोर्ट -ठाकुर विकास सिंह पीलीभीत।
पूरनपुर, पीलीभीत।विदेश जाने के लिए पासपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र माना जाता है, लेकिन पीलीभीत के थाना सेहरामऊ उत्तरी थाने की गढ़वाखेड़ा चौकी क्षेत्र के श्यामपुर गांव के एक युवक ने कथित रूप से इसी व्यवस्था को धोखा देकर दो अलग-अलग पहचान पर दो पासपोर्ट हासिल कर लिए। मामला सामने आने के बाद क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, लखनऊ ने इसे गंभीर धोखाधड़ी मानते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर आरोपी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।जानकारी के अनुसार पासपोर्ट विभाग की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। विभागीय अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2018 में युवक ने रविजोत सिंह नाम से पासपोर्ट बनवाया था। उस समय उसकी जन्मतिथि 5 फरवरी 1998 दर्ज कराई गई थी। पिता का नाम सरजीत सिंह, माता का नाम जसविंदर कौर तथा पता ग्राम गढ़वा खेड़ा, पोस्ट कजरी निरंजनपुर दर्ज था।आरोप है कि इसके बाद युवक ने अपनी पहचान से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों में बदलाव कराया और वर्ष 2023 में अमन जोत सिंह नाम से दूसरा पासपोर्ट बनवा लिया। दूसरे पासपोर्ट में केवल नाम ही नहीं बदला गया, बल्कि जन्मतिथि भी बदलकर 5 फरवरी 2001 कर दी गई। इतना ही नहीं, माता का नाम भी बदलकर सुखविंदर कौर दर्शाया गया। जबकि दोनों पासपोर्टों में पिता का नाम एक ही व्यक्ति का दर्ज है।पासपोर्ट विभाग का आरोप है कि युवक ने पहले से जारी पासपोर्ट की जानकारी छिपाकर नए दस्तावेजों के आधार पर दूसरी पहचान तैयार की और उसी के सहारे दूसरा पासपोर्ट हासिल कर लिया। विभागीय जांच में जब दोनों रिकॉर्ड का मिलान किया गया तो एक ही परिवार और समान विवरणों के बीच कई समानताएं सामने आईं, जिससे पूरे मामले का खुलासा हो गया।मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने संबंधित पासपोर्टों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस अधीक्षक पीलीभीत को पत्र भेजकर आरोपी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं और पासपोर्ट अधिनियम-1967 की धारा 12(1)(बी) के तहत कार्रवाई की संस्तुति की गई थी।शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों में बदलाव किस प्रकार कराया गया, इसमें किसी अन्य व्यक्ति या गिरोह की भूमिका तो नहीं है, तथा आरोपी ने दूसरी पहचान बनाने का उद्देश्य क्या था। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।वही यह मामला न केवल दस्तावेजी फर्जीवाड़े का गंभीर उदाहरण है, बल्कि पहचान सत्यापन प्रणाली पर भी कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस और पासपोर्ट विभाग की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क और फर्जीवाड़े की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
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