ईद मिलादुन्नबी का संदेश—सबके चेहरों पर हो मुस्कान गरीब और बेसहारा परिवारों की मदद के लिए आगे आएं लोग

ईद मिलादुन्नबी का संदेश—सबके चेहरों पर हो मुस्कान,गरीब और बेसहारा परिवारों की मदद के लिए आगे आएं लोग
पूरनपुर/पीलीभीत। ईद मिलादुन्नबी का पर्व मुस्लिम समाज के लिए प्रेम, शांति, भाईचारे और मानवता का संदेश लेकर आता है। इस अवसर पर पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को याद करते हुए जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करने का संकल्प लेना चाहिए। समाज में ऐसे अनेक परिवार हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी, इलाज, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ईद मिलादुन्नबी का संदेश है कि ऐसे लोगों की मदद कर उनके जीवन में खुशियां लाई जाएं।
नूर अहमद अजहरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने इंसानियत, समानता और भाईचारे को विशेष महत्व दिया। उन्होंने हमेशा गरीबों, बेसहारा लोगों, अनाथों और जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति रखने तथा उनकी सहायता करने की सीख दी। इसलिए ईद मिलादुन्नबी का पर्व केवल खुशी मनाने तक सीमित न रहे, बल्कि इसे मानव सेवा और जरूरतमंदों की मदद का अवसर बनाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि समाज में अमीर और गरीब के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। सक्षम लोगों को चाहिए कि वे अपने आसपास रहने वाले जरूरतमंद परिवारों की पहचान करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनकी मदद करें। किसी गरीब परिवार को राशन उपलब्ध कराना, बीमार व्यक्ति के इलाज में सहयोग करना, बच्चों की पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री देना या जरूरतमंद को कपड़े उपलब्ध कराना भी बड़ी नेकी है।
ईद मिलादुन्नबी के मौके पर घरों और मस्जिदों को सजाने के साथ-साथ गरीबों और बेसहारा लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया जाए। उन्होंने युवाओं से भी अपील की कि वे सामाजिक सेवा के कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव तथा भाईचारे को मजबूत करने का काम करें।नूर अहमद अजहरी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाएं पूरी मानवता के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने जरूरतमंदों की मदद, पड़ोसियों का ख्याल रखने, बीमारों की सेवा करने और छोटे-बड़े सभी का सम्मान करने की सीख दी। आज के समय में इन शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारना बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि ईद मिलादुन्नबी पर हम संकल्प लें कि अपने आसपास कोई व्यक्ति भूखा, मजबूर या इलाज के अभाव में परेशान न रहे। अपनी क्षमता के अनुसार उसकी मदद करें और मानवता की सेवा को अपनी जिम्मेदारी समझें। यही पैगंबर-ए-इस्लाम के बताए रास्ते पर चलने और ईद मिलादुन्नबी के संदेश को सार्थक करने का बेहतर तरीका है।


