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गैंगस्टर एक्ट में नौ अभियुक्त दोषी, आठ को तीन-तीन साल की सजा

पीलीभीत पुलिस की प्रभावी पैरवी से कोर्ट का फैसला, एक अभियुक्त को चार साल आठ माह व दूसरे को दो साल दो माह कारावास

गैंगस्टर एक्ट में नौ अभियुक्त दोषी, आठ को तीन-तीन साल की सजा

पीलीभीत पुलिस की प्रभावी पैरवी से कोर्ट का फैसला, एक अभियुक्त को चार साल आठ माह व दूसरे को दो साल दो माह कारावास

पीलीभीत।अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पीलीभीत पुलिस की प्रभावी पैरवी के चलते गैंगस्टर एक्ट के मामलों में न्यायालय ने नौ अभियुक्तों को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई है। थाना हजारा और थाना बीसलपुर से संबंधित मामलों में न्यायालय ने आठ अभियुक्तों को तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास के साथ कुल 40 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं थाना बीसलपुर से संबंधित दो अभियोगों में अभियुक्त को अलग-अलग अवधि की सजा सुनाई गई है।पुलिस के अनुसार, पुलिस अधीक्षक पीलीभीत सुकीर्ति माधव के निर्देशन में अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना हजारा और बीसलपुर पुलिस के साथ मॉनिटरिंग सेल द्वारा न्यायालय में प्रभावी पैरवी की गई। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने अभियुक्तों को गैंगस्टर एक्ट की धारा 2/3 के तहत दोषसिद्ध माना।थाना हजारा के मामले में 29 जुलाई 2011 की सूचना के संबंध में मुकदमा अपराध संख्या 451/2011 धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान एकत्र साक्ष्यों के आधार पर प्रहलाद पुत्र नंकूल, परितोष पुत्र सबलू, रामभरोसे पुत्र धूरभरन, मंजूर अली पुत्र मुन्नवर अली, पिंटू पुत्र नगीना, रामकुमार पुत्र मुनेश्वर, शविन महाजन पुत्र सतीश और अफरोज आलम पुत्र महमूद उर्फ महबूब अली, निवासी राहुल नगर मजदूर बस्ती, थाना हजारा के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। न्यायालय में अभियोजन अधिकारी अमित कुमार शुक्ल तथा पैरोकार महिला कांस्टेबल काजल की प्रभावी पैरवी के बाद 3 सितंबर 2026 को सभी आठ अभियुक्तों को दोषसिद्ध करते हुए तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। थाना बीसलपुर के मामले में अकील उर्फ रंगीला पुत्र अहमद हुसैन, निवासी ग्राम मीरपुर वाहनपुर, थाना बीसलपुर के खिलाफ वर्ष 2012 और 2020 में गैंगस्टर एक्ट के दो मुकदमे दर्ज हुए थे। न्यायालय ने दोनों मामलों में उसे क्रमशः दो वर्ष दो माह तथा चार वर्ष आठ माह के कारावास और प्रत्येक मामले में पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया।
पुलिस की इस कार्रवाई को अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाने और न्यायालय के माध्यम से सजा दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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