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चूका की बढ़ी चमक: 12 साल में पर्यटकों का सैलाब, आय ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, विदेशी सैलानियों की संख्या घटी

चूका इको टूरिज्म ने तोड़े रिकॉर्ड: 56,783 पर्यटकों ने किया भ्रमण,1.62 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त

 

पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के अंतर्गत संचालित चूका इको टूरिज्म का पर्यटन सत्र 2025-26 मंगलवार को समाप्त हो गया। इस सत्र में देश-विदेश के कुल 56,783 पर्यटकों ने चूका पर्यटन स्थल का भ्रमण किया, जिससे वन विभाग को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। यह पिछले वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने पर्यटन सत्र का शुभारंभ एक नवंबर 2025 को किया गया था, जिसे प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य जीव) के निर्देशानुसार 30 जून 2026 को बंद कर दिया गया। इस दौरान 56,567 भारतीय और 216 विदेशी पर्यटकों ने चूका का भ्रमण किया। हांलाकि पिछले साल की अपेक्षा इस बार विदेशी सैलानियों की संख्या कम हुई है। पर्यटन सत्र के दौरान राज्यपाल, अग्निशमन अधिकारी और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों समेत कई विशिष्ट अतिथि भी चूका पहुंचे और वन्य जीवों के दीदार किए। इस वर्ष पीटीआर में देश का पहला ‘दिव्य दर्शन कार्यक्रम’ भी आयोजित किया गया, जिसके तहत दिव्यांग बच्चों एवं उनके अभिभावकों को विशेष सफारी के माध्यम से चूका का भ्रमण कराया गया। पर्यटकों के ठहरने के लिए चूका में चार थार, एक बैंबू हट और एक ट्री हट की सुविधा उपलब्ध रही। इसके अलावा कैंटीन, सोवेनियर शॉप, नेचर शॉप, प्रकृति व्याख्या केंद्र और बोटर हट जैसी सुविधाएं भी पर्यटकों को आकर्षित करती रहीं। इस वर्ष विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने भी सफारी वाहनों के माध्यम से जंगल भ्रमण किया। पीटीआर में 110 टूरिस्ट गाइड, चार वॉच टावर, चार सिग्नेचर गेट और तीन होम स्टे संचालित किए गए। बराही वन विश्राम भवन से तीन नई सफारी गाड़ियों का संचालन भी शुरू किया गया। वहीं, बराही रेंज के सप्त सरोवर क्षेत्र में दो बैंबू हट, दो ग्रीन हट, दो लेट हट और कैंटीन की सुविधा पर्यटकों को उपलब्ध कराई गई। वर्ष 2024-25 में जहां 56,289 पर्यटकों ने भ्रमण कर 1.60 करोड़ रुपये का राजस्व दिया था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 56,783 पर्यटकों और 1.62 करोड़ रुपये के राजस्व तक पहुंच गया, जिससे चूका इको टूरिज्म ने नया रिकॉर्ड कायम किया है।


चूका इको टूरिज्म: 2014-15 से 2025-26 तक पर्यटकों की संख्या और प्राप्त राजस्व

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 में जहां चूका में केवल 14,172 पर्यटक पहुंचे थे और वन विभाग को 17.69 लाख रुपये का राजस्व मिला था,  2015-16 में 17,566 पर्यटक आए और 29.66 लाख रुपये की आय हुई। वर्ष 2016-17 में 16,360 पर्यटकों से 37.50 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2017-18 में 14,887 पर्यटक पहुंचे और 32.06 लाख रुपये की आय हुई, जबकि वर्ष 2018-19 में 15,885 पर्यटकों से 36.72 लाख रुपये का राजस्व मिला। वर्ष 2019-20 में पर्यटकों की संख्या घटकर 7,122 रह गई और राजस्व 17.29 लाख रुपये तक सिमट गया। हालांकि इसके बाद चूका इको टूरिज्म ने तेजी से वापसी की। वर्ष 2020-21 में 12,389 पर्यटकों से 26.07 लाख रुपये, वर्ष 2021-22 में 18,745 पर्यटकों से 45.09 लाख रुपये तथा वर्ष 2022-23 में 23,525 पर्यटकों से 51.04 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।इसके बाद चूका इको टूरिज्म ने नए कीर्तिमान स्थापित किए। वर्ष 2023-24 में 54,378 पर्यटक पहुंचे और 1.35 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 56,289 पर्यटकों और 1.60 करोड़ रुपये के राजस्व तक पहुंच गया। वहीं वर्ष 2025-26 में कुल 56,783 पर्यटकों ने चूका का भ्रमण किया, जिससे वन विभाग को 1.62 करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

खास बातें:

वर्ष 2025-26 में अब तक का सर्वाधिक 56,783 पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया।

इस वर्ष ₹1.62 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ, जो अब तक का सर्वाधिक है।

वर्ष 2019-20 में पर्यटकों की संख्या घटकर 7,122 रह गई थी, जबकि इसके बाद लगातार वृद्धि दर्ज की गई।

पिछले तीन वर्षों में चूका इको टूरिज्म ने पर्यटकों की संख्या और आय, दोनों मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हासिल की है।

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