कागजों में फॉगिंग, सफाई के नाम पर लाखों का भुगतान! ग्राम प्रशासक और सचिव के गठजोड़ से विकास कार्य ठप,जांच के घेरे में ग्राम पंचायतें

कागजों में फॉगिंग, सफाई के नाम पर लाखों का भुगतान! ग्राम प्रशासक और सचिव के गठजोड़ से विकास कार्य ठप,जांच के घेरे में ग्राम पंचायतें
पीलीभीत। गांवों के विकास और साफ-सफाई के लिए आवंटित सरकारी धन के इस्तेमाल पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले के कई ब्लॉकों की ग्राम पंचायतों में फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के आरोप हैं। दूसरी ओर, गांवों में विकास कार्यों की स्थिति और खर्च की पारदर्शिता को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि ग्राम प्रशासक और सचिवों के गठजोड़ के चलते ग्राम निधि का मनमाने ढंग से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि जरूरी विकास कार्यों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा।पूरनपुर, अमरिया, ललौरीखेड़ा, बिलसंडा, बरखेड़ा, बीसलपुर और मरौरी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में खर्च की गई धनराशि को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और सफाई जैसे कार्यों के नाम पर भुगतान दिखाकर सरकारी बजट खपाया जा रहा है। कुछ मामलों में चहेते लोगों के निजी बैंक खातों में सरकारी धनराशि भेजे जाने की चर्चा भी है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए भुगतान अभिलेखों, बिल-वाउचर और मौके पर कराए गए कार्यों की जांच जरूरी है।ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि का उद्देश्य गांवों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करना, साफ-सफाई सुनिश्चित करना और जनहित के कार्य कराना है। लेकिन यदि फॉगिंग और सफाई के नाम पर भुगतान तो हो रहा है और धरातल पर कार्य दिखाई नहीं दे रहे, तो यह व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को यह जानने का अधिकार है कि उनके गांव के विकास के लिए आवंटित धनराशि कहां और किन कार्यों पर खर्च की गई।आरोप यह भी हैं कि प्रशासक व्यवस्था के दौरान कुछ पंचायतों में विकास कार्यों की प्राथमिकताओं को दरकिनार कर भुगतान पर अधिक जोर दिया जा रहा है। यदि ऐसा है, तो इसका सीधा असर गांवों की बुनियादी सुविधाओं पर पड़ सकता है। सरकारी धन से कराए गए कार्यों का सत्यापन और भुगतान की वैधता की जांच के बिना इन आरोपों की सच्चाई सामने आना मुश्किल है।अब सवाल यह है कि ग्राम पंचायतों में खर्च की गई लाखों की धनराशि का हिसाब कौन लेगा? क्या संबंधित विभाग भुगतान अभिलेखों की जांच कराएगा और यदि सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी? गांवों के विकास के लिए आवंटित धन का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। निष्पक्ष जांच ही इन आरोपों की सच्चाई सामने ला सकती है।
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कई सचिवों की आवंटित पंचायतों पर उठे सवाल
बिलसंडा, बरखेड़ा, बीसलपुर, मरौरी, अमरिया, ललौरीखेड़ा में कुछ सचिवों की आवंटित पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं। संबंधित की पंचायतों के अभिलेखों की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।कुछ सचिवों के राजनीतिक लोगों से करीबी संबंध होने की चर्चाएं भी हैं। आरोप है कि इसी वजह से शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही।
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डीएम की निगरानी में जांच की उठ रही जरूरत
मामले में ग्राम निधि से हुए भुगतान, संबंधित स्वीकृतियों, बिल- वाउचर, कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र और लाभार्थियों के बैंक खातों की जांच महत्वपूर्ण है। साथ ही मौके पर फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और सफाई कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए, ताकि कागजों में दर्ज खर्च और धरातल पर हुए कार्यों के बीच अंतर स्पष्ट हो सके।




