दो दिन का सफर दिखावा या ईधन बचत, नेता-अफसरों की “ईंधन बचत यात्रा” पर सवालों की बौछार

दो दिन का सफर दिखावा या ईधन बचत, नेता-अफसरों की “ईंधन बचत यात्रा” पर सवालों की बौछार
जनता बोली—सिर्फ फोटोशूट और दिखावे की सियासत
पीलीभीत। नेता और अफसरों द्वारा दो दिन तक बाइक, ई-रिक्शा, पैदल और बस से सफर करने की पहल को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। लोग इसे ईंधन बचत और जनसंपर्क का प्रयास बता रहे हैं तो बड़ी संख्या में यूजर्स इसे दिखावा और ड्रामा” करार दे रहे हैं।चइस मुद्दे पर बेवाक कलम से आपकी आवाज कालम में “आपकी राय क्या है?” सवाल पूछे जाने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सीधे तौर पर इसे केवल प्रचार और छवि सुधारने की कवायद बताया। रवि यादव ने लिखा कि यह सब “दिखावे का दौर” है, जहां पेट्रोल-डीजल बचत से लेकर गैस, रोजगार और भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था तक केवल दिखावा ही चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी हकीकत में जनता को राहत नहीं मिल रही है, जबकि कागजों में उपलब्धियां गिनाई जा रही हैं।नितिन वर्मा ने तंज कसते हुए लिखा कि अब इन वाहनों का फोटो-वीडियो भी नहीं दिखेगा और यह सब “दो दिन का ड्रामा” था। वहीं एक अन्य टिप्पणी में इसे केवल दिखावा बताते हुए कहा गया कि असली समस्या गर्मी और आम जनता की परेशानियां हैं, जबकि जिम्मेदार लोग आरामदायक सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।सपा नेता अकील खान अजीजी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग देश हित के नाम पर बड़े-बड़े दावे करते हैं, वे ईंधन बचत जैसे मुद्दों पर गंभीर नहीं हो सकते। उन्होंने इसे “नौटंकी” बताते हुए कहा कि सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की जाती।दीपक कुमार मिश्रा, हरीश वर्धन और डॉ. दिनेश गुप्ता सहित कई लोगों ने इसे केवल “दिखावा” और “टोटली ड्रामा” बताया। वहीं समाजसेवी धनंजय मिश्रा ने इसे राजनीतिक भ्रष्टाचार से जोड़कर देखा।दिनेश वर्मा ‘कनक’ ने नेताओं की तुलना गिरगिट से करते हुए कहा कि ये केवल रंग बदलने की राजनीति है और जनता की समस्याएं इनके एजेंडे से गायब रहती हैं। इसके अलावा रामसेवक वर्मा ने व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए एक साइकिल यात्रा और कार से वीडियो बनाकर फोटो साझा करने का जिक्र किया, जिसे भी लोगों ने दोहरे रवैये का उदाहरण बताया। कुल मिलाकर यह पूरा मुद्दा सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जहां एक वर्ग इसे जनसंपर्क और जागरूकता अभियान मान रहा है, तो दूसरा इसे केवल “दिखावा और राजनीतिक स्टंट” बता रहा है।



