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विधायक डॉक्टर रागनी सोनकर के मंच पर नहीं दिखी सपा की एकजुटता, गुटबाजी ने बिगाड़ा सियासी संदेश

विधायक रागनी सोनकर के मंच पर नहीं दिखी सपा की एकजुटता, गुटबाजी ने बिगाड़ा सियासी संदेश

सद्भावना सम्मेलन से दिग्गज गायब, 2027 से पहले बढ़ी अंदरूनी खींचतान

पीलीभीत। समाजवादी पार्टी की 129 विधानसभा पूरनपुर सीट पर वर्ष 2027 के चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। पार्टी में टिकट की दावेदारी को लेकर कई नेता सक्रिय हैं और अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। इसी कड़ी में गुरुवार को जौनपुर जनपद की मछलीशहर विधानसभा से सपा विधायक डॉ. रागनी सोनकर के सम्मान में सद्भावना सम्मेलन आयोजित किया गया। हालांकि यह सम्मेलन पार्टी की एकजुटता का संदेश देने के बजाय अंदरूनी गुटबाजी की चर्चा का केंद्र बन गया। कार्यक्रम का आयोजन सपा नेता प्रदीप सोनकर की ओर से किया गया, जिसे उनकी राजनीतिक सक्रियता और संभावित दावेदारी से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन सम्मेलन में पार्टी के कई प्रमुख नेताओं और संभावित दावेदारों की गैरमौजूदगी ने अनेक सवाल खड़े कर दिए। पूरनपुर विधानसभा सीट पर सपा से टिकट की दौड़ में कई नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं, लेकिन इनमें से कोई भी नेता कार्यक्रम में दिखाई नहीं दिया। यही नहीं, जिले और पूरनपुर क्षेत्र से जुड़े कई पदाधिकारी और वरिष्ठ सपा नेता भी सम्मेलन से दूरी बनाए रहे। कार्यक्रम स्थल पर पड़ी खाली कुर्सियां भी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं। राजनीतिक गलियारों में इसे समाजवादी पार्टी के भीतर बढ़ती गुटबाजी और आपसी खींचतान के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी अपने नेताओं को एक मंच पर नहीं ला पा रही, उसके लिए आगामी चुनाव की राह आसान नहीं होगी। हालांकि सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा कार्यक्रम में सक्रिय नजर आए और उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर संगठन को मजबूत करने की अपील की। वहीं विधायक डॉ. रागनी सोनकर ने मंच से भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कोविड प्रबंधन, लखनऊ में हुए अग्निकांड और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए उसे विफल बताया। साथ ही उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों, विशेषकर चीनी मिल संचालन के मुद्दे को लेकर भी सवाल उठाए। सम्मेलन के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, लेकिन पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय नेताओं की गैरमौजूदगी और पार्टी के भीतर दिखाई दी दूरी ही रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समाजवादी पार्टी समय रहते अंदरूनी मतभेदों को दूर नहीं कर सकी, तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इसका असर पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। फिलहाल सद्भावना सम्मेलन ने सपा की अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।

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